Achievements

Arjun MundaAchievements

श्री अर्जुन मुंडा जी उपलब्धियों के बारे में चर्चा करने पर ज्यादा उत्साहित नहीं होतें हैं. एक अजीब-सी निराशा का भाव उन्हें घेर लेता है जैसे मजबूरी और बेबसी में कोई मन-मसोस कर रह जाता है – काश, मुझे समय और समर्थन मिलता तो मैं और अधिक कर पाता; अपने लोगों के आँखों के आंसू पोंछ पाता; उनके होठों पर मुस्कान बिखेर सकता; उनके दामन में ढेर-सारी खुशियाँ डाल सकता.

यद्दपि श्री मुंडा जी ने बहुत-सी ऐसी योजनाएं लागू की जो अपने समय से काफी आगे थीं और कई दूसरे लोगों के लिए पथ-प्रदर्शक भी बनीं परन्तु अपने झारखंड के भाई-बहनों के लिए अनेकों अन्य सोची एवं प्रस्तावित कार्यक्रमों को गठबंधन की संकीर्ण राजनीति के कारण वे उनतक पहुंचा नहीं पाए इसका अफ़सोस उनके चेहरे पर और आँखों में साफ़ झलकता है.

2000 नवम्बर में जब झारखंड में श्री बाबूलाल मरांडी ने अन्य दलों के साथ मिलकर बीजेपी की पहली सरकार बनाई तो श्री अर्जुन मुंडा जी को कल्याण विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गयी. उस समय से ही श्री मुंडा जी के सोचने-समझने का एक अलग नजरिया, प्रदेश और लोगों की समस्याओं के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण, समावेशी, समानतावादी चिंतन, और झारखंड के समग्र, समेकित विकास के लिए एक बाल-सुलभ आतुरता लोगों का ध्यान बरबस आकृष्ट करने लगा था. जल्द ही उनकी दूरदर्शिता और उनके दर्शन-चिंतन की झलक उनकी योजनाओं में मिलने लगी थीं जो बाद में उनके मुख्यमंत्री बनने पर और भी प्रबलता से मुखरित और अभिव्यक्त होने लगीं. उन्होंने लगभग सभी क्षेत्रों के विकास के लिए संभावनाओं का गंभीरता से मूल्यांकन किया और निष्कर्षों के आधार पर समयबद्ध रूपरेखा बनाने में जुट गए. परन्तु सर्वोच्च प्राथमिकता उन्होंने भौतिक और सामाजिक आधारभूत संरचना को दी जिसे उन्होंने विकास के दो सर्वप्रमुख लौह-स्तंभों की संज्ञा दी.

मानव संसाधन विकास एवं स्वास्थ्य

श्री मुंडा जी का मानना है कि यदि नागरिकों के लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा, कौशल-विकास, और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की जाये तो उच्च कोटि के मानव संसाधनों के बलपर विकास के पहिये को तेज गति दी जा सकती है और व्यक्तिगत और प्रादेशिक समृद्धि का सपना साकार हो सकता है.

घर-घर शिक्षा का संकल्प के तहत लगभग 200 प्रखंडो में +2 विद्यालयों तथा काफी संख्या में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की स्थापना हुई. +2 विद्यालयों के लिए शिक्षकों की बहाली हुई. जनजातीय लोगों की भावनाओं का ध्यान कर क्षेत्रीय भाषाओँ को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया. तीन नए विश्वविद्यालयों – राय विश्वविद्यालय, साई विश्वविद्यालय, उषा मार्टिन विश्वविद्यालय – की स्थापना के लिए कानून बने. सरकार ने गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा के विकास के लिए झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी विधेयक पास किया. वीबीयू हज़ारीबाग में इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रारंभ हुई. खूंटी में तकनीकी शिक्षा के हब बनाने के लिए भूमि की व्यवस्था की गयी. नए पोलिटेकनिक संस्थानों की स्थापना की विशेष पहल हुई.

बाल-विवाह और भ्रूण-हत्या जैसे सामाजिक कुरीतियों को रोकने तथा बालिकाओं के शिक्षा एवं संपूर्ण विकास के साथ-साथ लिंग-अनुपात को संतुलित करने के लिए अति प्रशंसनीय कन्यादान योजना और बाद में लाडली लक्ष्मी योजना की शुरुआत हुई. इन योजनाओं से जहां एक ओर गरीब पिता को वैवाहिक क़र्ज़ के लिए महाजनों के दानवी चंगुलों से राहत मिली, वहीँ दूसरी ओर बालिकाओं के सर्वांगीन विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक साहसिक कदम की मजबूत पहल हुई. निःशुल्क शिक्षा, साईकिल, पुस्तकें, और ड्रेस ने बालिकाओं के नामांकन में आशातीत बढ़ोत्तरी लाई और उनका ड्रॉपआउट रेट भी तेजी से गिरने लगा. वे सबल और समर्थ बनने लगे थे, यही योजना की संतोषप्रद विजय थी और जनता द्वारा उसका सहर्ष अनुमोदन भी.

राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रसार के लिए एचईसी रांची तथा सेल बोकारो को झारखंड सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए एनओसी दिया. बीपीएल परिवारों को अनुदान एवं वृद्धों को आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गयी. मेडिकल इमरजेंसी सिस्टम के लिए पहल हुई. ट्रॉमा सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्माण हुआ. कई बड़े अस्पताल भी बनाये गए. जनसंख्या पर डॉक्टरों के अनुपात को बेहतर करने के उद्देश्य से सैंकड़ों चिकित्सकों की नियुक्ति हुई, उनकी सेवानिवृति की आयु में वृद्धि की गयी तथा उनके लिए नए पदों का सृजन भी किया गया. आदिम जनजाति परिवारों से चयनित सैंकड़ों सहिया की नियुक्ति हुई. अनेकों मोबाइल मेडिकल यूनिट स्थापित किये गए.

भौतिक बुनियादी ढांचा विकास

पूरे प्रदेश में सड़क निर्माण अभियान के लिए संतुलित पथ निर्माण की कार्य योजना बनी. रांची-बोकारो-धनबाद एक्सप्रेस हाईवे को एग्रो-इंडस्ट्रियल इकनोमिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने हेतु निर्माण का निर्णय हुआ. साहेबगंज में गंगा नदी पर पुल निर्माण की विशेष पहल हुई. रेल मंत्रालय की सहभागिता से रेल ओवरब्रिज का निर्माण हुआ. सड़कों के लिए धन जुटाने के लिए झारखंड पथ विकास निधि अधिनियम लागू हुआ और पीपीओ मोड पर सड़कों के विस्तार के लिए कानूनी उपबंध पारित हुआ. सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए झारखंड एक्सेलेरेटेड रोड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का गठन हुआ. पीएमजीएसवाई के अन्तर्गत पथ निर्माण कर हजारों बसावटों को जोड़ा गया. राज्य भर में जिला स्तरीय कार्यालय, समाहरणालय, अनुमंडल कार्यालय, कोर्ट भवन, न्यायाधीश आवास, परिसदन भवन, पदाधिकारी आवास आदि का भी बड़ी संख्या में निर्माण हुआ.

औद्योगिक विकास

झारखंड के प्रचुर प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों को राज्य के हितों और पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर समेकित औद्योगिक विकास की रूप-रेखा तैयार की गयी. अनेक भारतीय औद्योगिक घरानों और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए और उन कम्पनियों में स्थानीय युवाओं के रोजगार के लिए 2 एवं 3-वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किये गए. पर गठबंधन की संकीर्णता और विवशताओं ने कुछ एक औद्योगिक ईकाइयों के प्रगति और विकास को छोड़कर बाकी सब को शुरू होने से पहले ही लील लिया. सफल ईकाइयों में पतरातू स्थित जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड तथा बोकारो में स्लैग आधारित सीमेंट प्लांट सम्मिलित हैं.

देवघर, दुमका, और जमशेदपुर में एयरपोर्ट; गोड्डा में दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय और हैंडलूम क्लस्टर का निर्माण; सिल्ली में ग्रामीण विकास एवं नियोजन प्रशिक्षण संस्थान; दुमका में रेशम उत्पादन अभियान और रेल यातायात की शुरुआत; गढ़वा में तहले नदी पर पुल सभी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए उठाये गए सराहनीय कदम हैं. औद्योगिक विकास की दिशा और चिंतन को मजबूती देने के लिए राज्य में “झारखंड औद्योगिक नीति, 2012” लागू की गयी.

कृषि और कृषितर क्षेत्र में विकास

सभी प्रखंडों में गोदामों की व्यवस्था और सैंकड़ों ग्रामीण अन्न बैंकों की स्थापना हुई. शुद्ध बोया गया कृषि क्षेत्र में 26 प्रतिशत से ज्यादा का इज़ाफा रजिस्टर किया गया. कृषि उत्पादों पर टैक्स में कमी की गयी. धान, चावल, गेंहू, मैदा, सूजी और समकक्ष खाद्यानों को कर मुक्त करने का फ़ैसला लिया गया. बीज वितरण नीति लागू की गयी. कृषितर क्षेत्रों में मुर्गीपालन, मछलीपालन, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरिकल्चर, सेरिकल्चर जैसे संभावनाओं से भरे क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाये गए.

खाद्यान्न के उठाव के लिए राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम को रिवॉल्विंग फंड दिया गया. अनुदानित दर पर राज्य व्यापी धान क्रय की व्यवस्था की गयी. महिला स्वयं सहायता समूह को जन वितरण की दुकानों की अनुज्ञप्ति हुई. खाद्यान्न आपूर्ति में पारदर्शिता के लिए खाद्यान्न दिवस के आयोजन किये गए.

एक लाख से भी अधिक कुओं और हजारों चेक डैम का निर्माण हुआ. सहकारी बैंकों का गठन हुआ जिसके तहत किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा, एवं समेकित सहकारी परियोजना की शुरुआत हुई. 54 पैक्स और लैंपस में माइक्रो क्रेडिट सिस्टम की व्यवस्था की गयी.

कुछ और भी महत्वपूर्ण कार्य हुए. अजय बराज का उद्घाटन हुआ. कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय का शिलान्यास हुआ. डेयरी टेक्नोलॉजी इंस्टीच्यूट की स्थापना का निर्णय हुआ.

पर्यटन विकास

झारखंड में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं. यहाँ के प्राकृतिक जलप्रपात, डलमा वन्य-जीव सैंक्चुअरी, बेतला और हज़ारीबाग के राष्ट्रीय उद्यान, नेतरहाट का मनोरम सनराइज पॉइंट, पारसनाथ पहाड़ियों पर जैनियों के भगवान महावीर की ज्ञानस्थली, ख़ूबसूरत नदियों, पहाड़ों, झरनों का किलकिलाता कर्णप्रिय मधुर संगीत, और प्रकृति की छावं में यहाँ का रचा-बसा ग्रामीण जीवन और वहां रहनेवाले भोले-भाले लोग किसी काल्पनिक दुनिया से कम मनोहारी और आकर्षक नहीं हैं.

पर्यटन को बढ़ावा और उसके सम्यक विकास के लिए कौशल विकास मिशन गठित किया गया. देवघर में श्रावणी मेले में शिव भक्तों और उपासकों के लिए क्यू कम्प्लेक्स का निर्माण हुआ. रांची के निकट ब्राम्बे में होटल प्रबंधन संस्थान के निर्माण का निर्णय हुआ. राज्य के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास लिए रूप-रेखा तैयार की गयी जिसमें कई स्थानों पर यातायात, आवास, सुरक्षा, यात्री-सुविधाओं पर महत्त्वपूर्ण कार्य हुए. परन्तु अभी बहुत कुछ और करने की ज़रुरत है जिसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण और धैर्यपूर्ण कार्यान्वयन शैली की नितांत आवश्यकता होगी.

राष्ट्रीय खेलों का आयोजन

34वें राष्ट्रीय खेलों का रांची में सफल आयोजन हुआ. उन खेलों के लिए विश्वस्तरीय खेल स्टेडियम तथा अन्य भौतिक आधारभूत संरचना का निर्माण हुआ जिसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई.

आज रांची का नाम भारत के उन गिने-चुने शहरों में शुमार किया जाता है जहां लगभग सभी प्रकार के खेलों के लिए उत्कृष्ट बुनियादी ढांचा उपलब्ध है. एस्ट्रोटर्फ हॉकी और फुटबॉल स्टेडियम, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के अतिरिक्त एथलेटिक्स, साइकिलिंग, शूटिंग, तैराकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, टेनिस, बैडमिंटन और ट्रैक एंड फील्ड के लिए बेहरतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम मौजूद है. झारखंड सरकार राज्य में खेलों के प्रसार करने और उनकी गुणवत्ता बढ़ाने के उद्धेश्य से इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर के एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बनाने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है. यदि यह योजना सफल होती है तो आनेवाले वर्षों में झारखंड नए और उभरते खिलाड़ियों की जन्मस्थली बन सकता है और यह आशा की जा सकती है कि देश और प्रदेश को महेंद्र सिंह धोनी और दीपिका कुमारी जैसे अनेक सुपरस्टार खिलाड़ी दे सकता है.

झारक्राफ्ट एवं रेशम उत्पादन

प्रदेश के हस्तशिल्प और अन्य परंपरागत विधाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए सरकार ने झारक्राफ्ट की स्थापना की जिसने बहुत ही कम समय में झारखंड को जैविक सिल्क उत्पादन के क्षेत्र में भारत का अग्रणी राज्य बना दिया. झारक्राफ्ट ने न केवल सभी पूर्वानुमानों और अपेक्षाओं को पूरा करने का काम किया है बल्कि उपलब्धियों के नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं. पेटा (PETA) तथा अन्य जीव-रक्षा आन्दोलनों की वजह से जैविक सिल्क की मांग आज पूरी दुनिया में बढ़ रही है और झारखंड को दुनिया के अनेक देशों में बाज़ार मिल रहा है. इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर महिलाओं के लिए, रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और उनकी आय बढ़ रही है. सिल्क उत्पादन में आज 50000 से भी ज्यादा महिलाएं कार्यरत हैं और अपने और प्रदेश दोनों के लिए धन उपार्जन कर रहीं हैं.

पंचायत चुनाव

32 वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद झारखंड में लंबित पंचायत चुनाव कराये गए और प्रशासन में विकेन्द्रीकरण की एक महत्वपूर्ण शुरुआत हुई. इन चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है परन्तु निर्वाचित त्रिस्तरीय प्रतिनिधियों में महिलाओं की संख्या 55 प्रतिशत से भी अधिक रहना शासन प्रणाली में जन भागीदारी के उत्साह को दर्शाता है जो प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए बहुत ही शुभ और स्वस्थ संकेत हैं. पंचायती राज संस्थाओं के अधिकार योजना में सहभागिता से शासन-तंत्र और मजबूत होगा जो एक संवेदनशील, प्रतिबद्ध, पारदर्शी सुशासन के अभिनव प्रयास की दिशा में गाँधीवादी विचारों और चिंतन से उपजा एक सराहनीय कदम सिद्ध होगा.

अल्पसंख्यक एवं आदिम जनजातीय कल्याण कार्य

राज्य की अल्पसंख्यक समुदाय के बहु आयामी विकास के लिए 15-सूत्री कार्यक्रम समितियों का गठन हुआ और अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की स्थापना की गयी. अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को होटल मैनेजमेंट, मशीनिस्ट सहित दर्जनों ट्रेड में प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी. अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृति और साईकिल मुहैय्या कराया गया और उनके लिए छात्रावासों के निर्माण की योजना बनाई गई.

अनुसूचित जनजातियों के लिए श्री अर्जुन मुंडा जी की सरकार ने निःशुल्क खाद्यान्न, आवास, चिकित्सा सहायता, एवं आसान ऋण योजना उपलब्ध करायी. वन-अधिकार अधिनियम का कार्यान्वयन कर वन-समितियों का गठन किया गया. लाह विकास योजना से हजारों जनजातीय परिवारों को लाभ पहुंचाने का काम हुआ. आदिम जनजाति हेतु प्राथमिक विद्यालय तथा नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में आश्रम विद्यालय खोले गए. सभी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृति, साईकिल, पोशाक, परीक्षा शुल्क प्रति पूर्ति की व्यवस्था हुई.

इसके अतिरिक्त, झारखंड जनजातीय परामर्शदात्री परिषद (टी.ए.सी.) का गठन किया गया. राज्य के रांची, खूंटी, पू. सिंहभूम, एवं सरायकेला जिलों के 12 प्रखंडों के 300 से अधिक गावों में आदिवासी विकास कार्यक्रम संचालित किये गए.

कई अग्रणी एवं अन्य महत्वपूर्ण कदम

झारखंड देश का अग्रणी राज्य बना जहाँ इलेक्ट्रॉनिक सर्विस डिलीवरी एक्ट पास किया गया जिसके अन्तर्गत: ई-गवर्नेंस: ऑनलाइन सरकारी खरीद, टेंडर, निबंधन, रिटर्न दाखिला, कर भुगतान एवं अन्य अनेक कार्यों के लिए एक पारदर्शी, ज़िम्मेवार प्लेटफार्म की व्यवस्था की गयी. आपका सीएम डॉट कॉम: मुख्यमंत्री के पास स्वयं लोगों की समस्याओं और शिकायतों को सुनने, जानने, और निष्पादित करने की इंटरनेट पर आधारित एक सीधी, सशक्त, और अनूठी संचार एवं संवाद की व्यवस्था हुई.

कुछ अन्य उल्लेखनीय कार्यों की बात करें तो भू-अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण एवं डिजिटाईजेशन का काम प्रारंभ हुआ. राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन हुआ; लोकायुक्त की नियुक्ति हुई. अनिवार्य सेवा प्रदाय अधिनियम बना जिससे 50 से भी अधिक सेवाओं जैसे पेंशन, छात्रवृति, ड्राइविंग लाइसेंस, प्रमाण पत्र इत्यादि में समयबद्ध सेवा को अनिवार्य बनाया गया.